!भारत विरोधी बाये कम नहीं नीचों ने कर्ण को महान बताया तो कुछ 'बम मन' जन अश्वत्थामा को महान बताने लगे। परंतु कुछ अच्छाईयां तो भी दोनों खलनायक ही है।
कर्ण के दानी होने की बहुत चर्चा होती है। हो सकता है हो भी। परंतु द्रौपदी को नंगा करने का सुझाव उसी ने दिया था। अभिमन्यु को मारने भी उसका सक्रिय सहभाग था। अज्ञातवास में अर्जुन ने उसे ही नहीं बल्कि भीष्म, द्रोण सहित सभी को भगाया था। और बाये कम नहीं नीच उसे महान बताने है।
अश्वत्थामा ऋषि द्रोणाचार्य का संतान तो था, परंतु अपने वासनाओं पे नियंत्रण नहीं रख सका। ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बावजूद द्रोण और उसने अधर्म का केवल साथ नहीं दिया, परंतु स्वयं लडे ये तो अधर्म किया ही और अभिमन्यु और द्रौपदी के सुतो को भी मार दिया। इतना ही नहीं अश्वत्थामा ने तो गर्भ में पल रहे पांडवों के वंश को भी नष्ट करने का प्रयत्न किया। वो तो द्रौपदी की क्षमाशीलता थी इसलिए उसे जिंदा बक्षा गया।
द्रौपदी: सच्ची नायिका!
द्रौपदी के बारे में अनेक वदंताए फैलाई गयी उसमे एक है उसने दुर्योधन को अंधे का पुत्र अंधा कहा। परंतु मूल महाभारत में ऐसा कुछ नहीं है। ये नंबर के युरोपिय और उनके कम नहीं नीच मानसिक दासों(गुलाम) ने फैलाई हुई बातें है।
अंत तक पढ़ने वालों के आभार और धन्यवाद!
जय सिंध, जय महाराष्ट्र, जय शिवराय!
छत्रपति शिवाजी महाराज की जय!
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