Thursday, 11 December 2025

तिसरी आंख!

पुराणों में वर्णन हैं कि शिव को तीन आंखें हैं। दो खुलीं और एक बंद रहतीं हैं। वो तब ही खुलतीं है जब शिवजी क्रोधित होते हैं। इस पर विधर्मी और तथाकथित अंधश्रद्धा निर्मूलक, सेकुलर हमारा(हिंदू ओ का) मजाक उड़ाते हैं। और अक्सर हमारे पास कोई उत्तर नहीं होता है क्योंकि हम अभ्यास नहीं करते हैं, चिंतन नहीं करते हैं।
पुराणों में जो वर्णन हैं वो आलंकारिक है। हमें समझाते सोपा हो इसलिए! ये तिसरी आंख हमारे पास भी है। परंतु वो दैहिक नहीं है, बौद्धिक है। वो आंख हैं सद्सदविवेकबुद्धि! दो हम में अवश्य होती है परंतु बहुतांश जन उपयोग नहीं करते याने खोलते नहीं। ये आंख जब खुलतीं है तब अज्ञान और मोह को दूर करतीं हैं। याने कि भस्म!
कामदहन क्या हैं!
पुराणों में शिव जी द्वारा कामदेव को जलाने का वर्णन हैं। अति काम वो किसी भी रूप में ही मनुष्यों के जीवन से सुख-शांति, आनंद छीन लेता हैं। कामी मनुष्य का घर अगर चांर कमरों का हों तो वो सोचेगा और दो कमरे हो। छे कमरों का भी हो जाए तो वो वहीं सोचेगा। उसके पास दुचाकी हो तो वो सोचेगा स्वयंचालित हों जाएं। स्वयंचालित हों जाएं तो वो सोचेगा अपनी चतु:चक्री हो जाएं। ऐसे ही काम, वासनाएं बढ़ती ही रहती है। उसे सद्सदविवेकबुद्धि से सिमित करना ही शहाणपण है।

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